भारत-पाकिस्तान के बीच एक वर्ष से ज्यादा के राजनीतिक संवाद और दोनों देशों के बीच व्यापार को सुगम तथा वीजा नियमों को आसान बनाने के लिए हुई कई दौर की सकारात्मक बातचीत के बावजूद दोनों पड़ोसी देश आतंकवाद के बुनियादी मुद्दे पर पहले की तरह ही दूर खड़े दिखाई दे रहे हैं. पिछले हफ्ते नयी दिल्ली में भारत और पाकिस्तान के विदेश विभाग के अधिकारियों के बीच हुई बैठक का उद्देश्य विश्वास बहाली के लिए माहौल तैयार करना था. लेकिन पहले की तरह ही इस बातचीत में भी मुख्य बाधा बन कर वह सवाल सामने आ गया कि 2008 में मुंबई पर हुए घातक हमले के लिए आखिर कौन जिम्मेवार है.इस हमले में 166 लोग मारे गये थे, जिसमें 6 अमेरिकी नागरिक भी शामिल थे.
हाल में मुंबई हमले के मुख्य आरोपी के पकड़े जाने और पूछताछ से प्राप्त जानकारी के आधार पर भारतीय अधिकारी पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ द्वारा दस आतंकियों को मदद पहुंचाने के सबूतों को सामने लाने के प्रति उत्सुक हैं. अब यह बात स्पष्ट हो गयी है कि मुख्य आरोपी सैयद जबीउद्दीन, जिसे अबु जिंदाल के नाम से भी जाना जाता है, मुंबई हमले के दौरान पाकिस्तान के कंट्रोल रूम में मौजूद था. हमले में आतंकियों ने कैफे, दो पांच सितारा होटल, रेलवे स्टेशन और यहूदी प्रार्थना घर को निशाना बनाया था.
पिछले हफ्ते पाकिस्तानी विदेश सचिव के साथ साझा प्रेस कान्फ्रेंस में भारतीय विदेश सचिव रंजन मथाई ने कहा था कि मुंबई आतंकी हमलों के आरोपियों को सजा दिलाना विश्वास बहाली का सबसे अच्छा तरीका होगा. अबु जिंदाल से चल रही पूछताछ से अब इस मामले का महत्व काफी बढ़ गया है. लेकिन भारत के इस बयान के एक दिन बाद, कि उसने 26/11 के आरोपी अबु जिंदाल से हुई पूछताछ से प्राप्त जानकारी पाकिस्तान के साथ साझा की है, पाकिस्तानी विदेश सचिव जलील अब्बास जिलानी ने इससे साफ इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि मुंबई हमले में जिंदाल की भूमिका के बारे में कोई जानकारी अब तक उनके साथ साझा नहीं की गयी है. जिलानी ने ये बातें अटारी सीमा से पाकिस्तान पहुंचने से पहले कही.
आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान हमेशा से भारत की राह में रोड़े अटकाता रहा है. मुंबई हमलों के साजिशकर्ताओं को सजा दिलाने की भारतीय मांग पर पाकिस्तान कोई ठोस जवाब देने में अब तक असफल रहा है. हकीकत यह है कि इस मामले में वह अब दूसरे देशों ही नहीं, अपने निकट सहयोगी सऊदी अरब से भी दूर होता जा रहा है. सऊदी अरब आतंकवाद के मुद्दे पर भारत के साथ सहयोग करने का फैसला कर चुका है. कई वर्षो से भारत में वांछित कुछ आतंकवादी पाकिस्तान से नयी पहचान के साथ पासपोर्ट बनवा कर बिना रोक-टोक सऊदी अरब की यात्र कर रहे थे और भारत असहाय होकर देखता रहता था. लेकिन अब हालात बदले हुए नजर आ रहे हैं. सऊदी अरब ने न केवल अबु जिंदाल को भारत को सौंप दिया है, बल्कि ऐसी खबरें हैं कि वह अगले कुछ हफ्तों में एक अन्य आतंकवादी को भी भारत को सौंपने की तैयारी कर रहा है.
सऊदी अरब की भारत के प्रति नीति में आया यह बदलाव अमेरिका में 11 सितंबर, 2001 के आतंकी हमले के बाद उसकी विदेश नीति में आये व्यापक बदलाव का हिस्सा है. अबु जिंदाल को सौंपना ऐसी घटना है, जो सऊदी अरब के भारत के प्रति बदलते नजरिये और साथ ही सऊदी समाज में आये आंतरिक बदलाव को दर्शाता है. साथ ही यह भारत के अमेरिकी हितों के साथ जुड़ने और ईरान से दूरी बनाने को भी रेखांकित करता है. यही नहीं, सऊदी अरब भारत को पूरे अरब जगत में पहुंचने का गेटवे भी मुहैया कराता है, जहां पाकिस्तान के मुकाबले भारत का प्रभाव काफी कम है.
सऊदी अरब भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने, व्यापारिक सहयोगियों तक पहुंच को सुगम बनाने और भारतीय मुसलमानों में कट्टरपंथ के बढ़ते प्रभाव को सुलझाने में भी मदद कर सकता है. भारतीय मुसलमान आकर्षक नौकरी की चाहत में मध्यपूर्व के देशों में जाना पसंद करते हैं. सऊदी अरब पिछले कई सालों से भारत का अच्छा दोस्त नहीं रहा है. हकीकत में उसने कई मौकों पर पाकिस्तान को ही पूर्ण समर्थन दिया है, खासकर दोनों देशों के बीच वर्षो से विवाद का मुद्दा रहे कश्मीर के मसले पर. ऐसे में अबू जिंदाल को भारत को सौंपना उसकी बदलती प्राथमिकता का परिचायक है. जिंदाल द्वारा मुंबई हमले का निर्देशन करना पाकिस्तान के लिए काफी शर्मनाक है. मुंबई हमले के सबूत अब पाकिस्तान के इसमें शामिल होने की ओर इशारा करते हैं. पाकिस्तान स्थित कंट्रोल रूम से दस आतंकियों को निर्देश देते जिंदाल की आवाज उस समय सुनी गयी थी, जब एफबीआइ ने इस कॉल को इंटरसेप्ट करने में मदद की थी. जांचकर्ताओं का कहना है कि जिंदाल ने बाद में पाकिस्तानी पासपोर्ट के साथ सऊदी अरब की यात्र की और वहां फंड इकट्ठा करने के अलावा भविष्य के हमलों के लिए नये लोगों को बहाल करने में जुट गया. अमेरिका ने सऊदी अरब में उसकी मौजूदगी का पता लगा कर नयी दिल्ली और रियाद को सतर्क कर दिया. अब पाकिस्तान में रह रहे आतंकवादियों के लिए पहचान बदल कर नये पासपोर्ट के जरिये सऊदी अरब जाना सुरक्षित नहीं रहा. कई वहां नियमत: हज यात्र और इसलामिक धर्मार्थ कार्यो के लिए जाते हैं. कुछ भारतीय मजदूर के तौर पर जाते हैं, ताकि आतंकी संगठन के लिए काम कर सकें.
